We Believe

Tilak was a man of unwavering conviction & absolute lack of dilemma –words of admiration by celebrated British Journalist Henry Nevinson. The Source of his conviction & dexterity in critical decision making is in the philosophy he believed in & lived. The philosophy of BhagavatGeeta. Following his footprints, the AIMRD will strive on finding the best possible solution to the problems & fight of the people of India. "अन्यायऔरअत्याचार करने वाला उतना दोषी नहीं माना जा सकता, जितना उसे सहन करने वाला। " -LokmanyaTilak मनुष्य एक विचारशील प्राणी है। वह सोचता-विचारता और चिन्तन करता है। विचारधारा के मूल में विचार ही प्रमुख है। लेकिन किसी विचार को विचारधारा बनने की दो शर्तें हैं - पहली शर्त कि वह विचार लम्बे समय तक धारा की तरह प्रवाहित होता रहे और दूसरी शर्त कि उसे सामाजिक स्वीकृति प्राप्त हो जाय। इस प्रकार कोई सदविचार समय के अन्तराल के साथ केन्द्रित होकर समाज की स्वीकृति प्राप्त कर लेता है और तभी वह विचारधारा के रूप में मान्य होता है। सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक या धार्मिक सभी क्षेत्रों में विचारधारा का निर्माण इसी प्रक्रिया के अनुरूप होता है। इसमें व्यक्ति (विचारक) के विचार की निरन्तरता और उसका प्रभाव तथा सामाजिक मान्यता तीनों चीजें महत्वपूर्ण होती हैं। एक राजनीतिक पार्टी के रूप में आल इंडिया मानव अधिकार राजनितिक दल की विचारधारा बाल गंगाधर तिलक महात्मा गांधी, राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण और बाबा साहेब भीमराव आम्बेडकर की विचारधारा है। भारत के संविधान में हमारी आस्था और समाजवाद, धर्म निरपेक्षता एवं लोकतंत्र के सिद्धान्तों में विश्वास है। गांधीवादी सिद्धान्तों तथा स्वतंत्रता आन्दोलन के मूल्यों, आदर्शों एवं परम्पराओं से प्रेरणा लेकर देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को सुरक्षित रखने के लिए हम कृतसंकल्प हैं। राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए विचारधारा की जानकारी इसलिए भी जरूरी है कि वे अपनी राजनीतिक परम्परा से परिचित हो सकें और अपने पुरखों की वैचारिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लें तथा उसके अनुरूप काम कर सकें। भारत के इतिहास के पन्नों को पलटा जाये, तो कई ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने भारत की आजादी के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किये. उन्हीं में से एक हैं बाल गंगाधर तिलक, जिनका नाम लेने में आज भी बहुत गर्व होता है. वे आधुनिक भारत के एक प्रमुख वास्तुकार थे. वे भारत के लिए स्वराज / स्वयं के नियम के प्रमुख समर्थक थे. उनका कथन था कि ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार हैं, और मैं इसे पा कर रहूँगा’. इन्होंने भारत के संघर्ष के दौरान एक क्रांतिकारी के रूप में कार्य किया. उन्हें उनके समर्थकों ने सम्मानित करने के लिए ‘लोकमान्य’ का ख़िताब दिया. वे एक महान विद्वान व्यक्ति थे, जिनका मानना था कि आजादी एक राष्ट्र के कल्याण के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है. उन्होंने स्व-शासन की मांग की. इसके लिए उन्होंने गाँव – गाँव जाकर किसानों और वहां के स्थानीय लोगों से स्व-शासन के लिए आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया. अप्रैल 1916 तक इस लीग में 1400 लोग ही शामिल हुए थे, किन्तु सन 1917 में यह आंकड़ा बढ़कर 32,000 तक पहुँच गया था. तिलक जी ने अपना यह होम रूल लीग महाराष्ट्र, केन्द्रीय प्रांत, कर्नाटका और बेरार क्षेत्र में शुरू किया. इसके बाद इसे पूरे भारत में शुरू किया गया. अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने देश की सेवा के लिए समर्पित होने का फैसला किया. उन्होंने अपने पूरे जीवन में महिलाओं की शिक्षा और उनके विकास के लिए कई कार्य किये. तिलक जी ने देश की सभी बेटियों को शिक्षित करने, और 16 वर्ष की आयु तक उनका विवाह नहीं करने के लिए लोगों को प्रेरित किया. लार्ड कर्ज़न द्वारा एक ऐसी रणनीति निर्धारित की गई थी, जिसमें राष्ट्रवादी आंदोलन को कमजोर कर बंगाल का विभाजन कर दिया गया था. इस तरह की रणनीति को तोड़ने के लिए तिलक जी ने स्वदेशी आंदोलन एवं बॉयकॉट आंदोलन को प्रोत्साहित किया. इस बॉयकॉट आंदोलन में विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और विदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल करने वाले किसी भी भारतीय का समाज से बहिष्कार शामिल था. और स्वदेशी आंदोलन में मूल रूप से भारत में बनाये गये सामानों का उपयोग शामिल था. इससे स्वदेशी एवं बॉयकॉट आंदोलन को एक ही सिक्के के दो पहलू कहा जा सकता है. इस तरह से इन्होने समाज को सुधारने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया. बाल गंगाधर तिलक जी ब्रिटिशों के शासन को हटाकर भारतीय ऑटोनोमी के लिए आंदोलन चलाने के लिए अपने राजनीतिक करियर की ओर चल दिए. गाँधी से पहले, वे सबसे ज्यादा व्यापक रूप से जाने माने भारतीय राजनेता थे. उन्हें उस समय का एक कट्टरपंथी राष्ट्रवादी माना जाता था, लेकिन वे एक समाजिक रुढ़िवादी थे. सन 1890 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए. उन्होंने इस पार्टी के दृष्टिकोण का विरोध किया, जोकि स्व-शासन के लिए लड़ाई की ओर नहीं था. उनका कहना था कि ब्रिटिशों के खिलाफ अपने आप में सिंपल संवैधानिक आंदोलन करना व्यर्थ है. इसके बाद वे प्रमुख कांग्रेस नेता गोपाल कृष्ण गोखले के खिलाफ खड़े हुए. वे अंग्रेजों को दूर करने के लिए एक सशस्त्र विद्रोह चाहते थे. लार्ड कर्ज़न द्वारा किये गये बंगाल के विभाजन के समय तिलक जी ने स्वदेशी आंदोलन और ब्रिटिश सामानों का बहिष्कार का दिल से समर्थन किया था.राजनीतिक परिवर्तन की इसी धारा से आल इंडिया मानव अधिकार राजनितिक दल का निर्माण हुआ है, जिसका नेतृत्व आज श्रीमति उर्मिला देवी कर राही हैं। हमें इस बात का गर्व है कि भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन के महापुरूषों के विचारों, आदर्शों और मूल्यों की जो राजनीतिक विरासत है, उसी की बुनियाद पर आल इंडिया मानव अधिकार राजनितिक दल का गठन हुआ है। महात्मा गांधी ने हमें आजादी दी, डॉ. लोहिया और जेपी ने उस आजादी की रक्षा करने और उसकी उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए संघर्ष का रास्ता दिखाया तथा डॉ. अंबेडकर ने उस लोकतंत्र को बचाने के लिए संविधान का रक्षा-कवच दिया। हमारा संसदीय लोकतंत्र उस संविधान के आधार पर चल रहा है। इन्हीं समाजवादी विचारों और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर जननायक कर्पूरी ठाकुर आये और सत्ता का उपयोग उन्होंने जन- सेवा के लिए किया। न्याय के साथ विकास का यह रास्ता लाभ समाज के अंतिम आदमी तक पहुंचे। आल इंडिया मानव अधिकार राजनितिक दल की राजनीति का यही लक्ष्य है जो लोकतांत्रिक और समाजवादी विचारधारा की बुनियाद पर खड़ा है।